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घर-परिवार में ध्यान रखनी चाहिए ये बातें, इनसे दूर रहता है कलह

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घर बसाना मुश्किल हो जाता है और परिवार न हो तो घर किसी काम का नहीं रहता। यदि मनुष्य जन्म लिया है और परिपूर्ण इंसान बनना चाहते हैं तो घर-परिवार दोनों होने चाहिए। लोगों को अपना ही घर-परिवार बोझ लगने लगता है। बसा तो लेते हैं, फिर दूर भागते हैं। परिवार में तनाव, कलह जिन कारणों से होता है उनमें एक है मालिकियत चलाना।
परिवार चलता है सर्वमत से। यानी कुछ-कुछ सबका अधिकार और मिला-जुला निर्णय। जब किसी सदस्य को लगने लगता है कि परिवार में हमारा महत्व नहीं है, मात्र उपयोग हो रहा है तो फिर गड़बड़ी शुरू हो जाती है। इसलिए कोशिश हो कि परिवार में सर्वमत हो। आज पढ़ाई-लिखाई के दौर में सभी ज्ञानी हो गए और कभी-कभी ज्ञान भी परिवार में बाधा बन जाता है।
परिवार में रहना हो तो ज्ञानी से ज्यादा भक्त हो जाइए। मतलब यह नहीं कि पूरी तरह से किसी धर्म से जुड़कर पूजा-पाठ में ही डूब जाएं। भक्त होने का सीधा-सा अर्थ है अपने ऊपर किसी और परमशक्ति पर विश्वास रखना। अपने परिवार में सौंदर्य जरूर देखिए। जीवन की सुंदरतम उपलब्धि है आपका परिवार होना और जब आप भक्त होते हैं तो फिर सौंदर्य के अर्थ ही बदल देते हैं।
एक भक्त भगवान में चार बातों में सौंदर्य देखता है- नाम, रूप लीला और धाम। परिवार में नाम का अर्थ है आपका वंश, आपका कुल, आपका गौत्र। रूप का अर्थ है परिवार अपने आप में बहुत सुंदर स्वरूप लिए हुए है। बच्चों का होना लीला है और यदि घर में माता-पिता या कोई भी बड़े-बूढ़े हैं तो समझ लीजिए यह धाम है। इस भाव से यदि परिवार में रहते हैं तो अपने मनुष्य होने पर गौरव भी होगा और सच तो यह है वह जो अधूरा पशुओं के पास नहीं होता, आपके पास पूरा होगा।

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