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पैनगंगा में उत्पादन का रिकार्ड

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घुग्घुस. वेकोलि वणी क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजना पैनगंगा ओपनकास्ट माइन्स ने अपना 63 लाख टन के लक्ष्य को हासिल कर एक नया रिकार्ड बनाया है. कोल इंडिया की कुल 431 कोयला खदानों में से इसे सुपर 30 में स्थान मिला है. 22 मार्च 2015 को इस खदान की शुरुआत हुई. खदान ने पिछले वर्ष 393.42 करोड़ का लाभ कमाया, जो 364.43 प्रश प्रगति है. सर्वाधिक कोयला उत्पादन खदान पहचान स्थापित की है. सर्वाधिक कोयले के डिस्पैच का रिकार्ड बनाया.

शुरुआत में आई दिक्कतें
वर्ष 2018-19 के दौरान पैनगंगा परियोजना को 45 लाख टन कोयला एवं 94 लाख घनमीटर ओबी माइन्स के कार्यरत ठेकेदारी संस्था एएसडीसी को दिया गया. विभागीय लक्ष्य 38.72 लाख घनमीटर काली मिट्टी हटाने का निर्धारण किया गया. वर्ष की शुरुआत के महीने अप्रैल, मई, जून में माइन्स की उत्पादन क्षमता लक्ष्य से बहुत पीछे चल रही थी. प्रतिदिन करीब 8,000 टन कोयला एवं 20,000 घनमीटर ओबी ही हो पा रहा था, जो कंपनी के लिए अति चिंतनीय विषय था. इस दौरान कोल इंडिया के उच्च अधिकारियों की टीम प्रोजेक्ट निरीक्षण करने एवं यह पता लगाने पहुंची कि आखिर पैनगंगा परियोजना अपने निर्धारित उत्पादन से इतना पीछे क्यों चल रहा है. माह जून से माइन्स की स्थिति में विशेष परिवर्तन होना शुरू हुआ. खदान के विभिन्न परिवहन मार्गों में सुधार, कोयला परिवहन के रास्ते में सुधार, सामान्य अनुशासन में अप्रत्याशित सुधार, मशीनों का समय में शुरू होना एवं समय तक कार्य करना आदि पर जोर दिया गया. इन सभी उपलब्धियों तथा खान में कार्यरत समस्त कर्मचारी, अधिकारी, क्षेत्रीय कार्यालय के सदस्य, विभिन्न ट्रेड यूनियन के सदस्य तथा वेकोलि के उच्च अधिकारियों एवं कंपनी स्तर के श्रमिक संगठनों को पूर्ण सहयोग प्राप्त होने से माइन्स ने उत्पादन, सुरक्षा एवं प्रेषण की रफ्तार पकड़ी.

सूपर 30 में शामिल
जिस कोयला खदान का स्टाक 14 लाख टन से घटकर शून्य स्तर तक पहुंच गया था उसे 63 लाख टन कोयले के उत्पादन का लक्ष्य दिया गया. इस लक्ष्य को पैनगंगा परिवार ने न केवल हासिल किया, बल्कि यह खदान वेकोलि के सूपर 30 खदानों में शामिल हो गई हैं. खदान द्वारा 3 फरवरी तक 45 लाख टन कोयले का उत्पादन किया गया था. पर्यावरण मंजूरी और कर्न्सन टू आपरेट अर्थात सीटीओ नहीं मिलने के कारण 22 दिन तक खदान बंद रही. इस बीच, कुछ सशस्त्र लुटेरों की टोली ने खदान पर हमला कर कोयला लूट की घटना को अंजाम दिया था. इस घटना की वजह से खदान के अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल गिरा था. जिससे कुछ दिनों तक उत्पादन प्रभावित रहा. इन सब के बावजूद वेकोलि वणी क्षेत्र के मुखिया मुख्य महाप्रबंधक उदय कावले के नेतृत्व में पैनगंगा के उपमहाप्रबंधक आर.एम. सोनवंशी, खदान प्रबंधक जितेंद्र चरडे समेत समस्त अधिकारी, कर्मचारी, श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी इन सभी के आपसी तालमेल और टीम वर्क की वजह से 63 लाख टन के उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त किया.

3 माह पूर्व ही क्षेत्रीय महाप्रबंधक के रूप में उदय कावले ने वणी क्षेत्र की कमान संभाली. आर.एम. सोनवंशी ने 15 मई 2018 को पदभार संभाला था. छिटपुट चोरी की घटनाएं भी न हो इसके देखते पैनगंगा प्रबंधन ने 10 बैरियर, चेकपोस्ट, जहां से गाड़ियों के माध्यम से कोयले की चोरी हो सकती है उस मार्ग पर खंदक खोद दिए. कोयला लूट के लिए पैनगंगा खदान की जो इमेज बनी थी उससे हटकर उत्पादन पर लक्ष्य केन्द्रित कर अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की. खदान के उपमहाप्रबंधक सोनवंशी ने वेकोलि अध्यक्ष सह प्रबंधक निदेशक आर.के. मिश्रा के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन तथा वणी क्षेत्र के मुखिया उदय कावले समेत कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी, खदान के अधिकारी एवं कर्मचारी, क्षेत्रीय कामगार संगठनों के पदाधिकारी साथ ही एएसडीसी कंपनी को सफलता का श्रेय दिया है.

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