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पतंजलि का दावा झूठा

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नागपुर. पतंजलि के संस्थापक रामदेवबाबा की ओर से विज्ञापनों पर यह दावा करते हुए देखे जा सकते हैं कि पतंजलि के खाद्य तेलों में कोलेस्ट्राल की मात्रा नहीं है, जबकि अन्य तेलों में कोलेस्ट्राल की मात्रा होती है. नागपुर एफडीए विभाग ने इस संबंध में ‘बाबा’ के दावें को झूठा बताया है. अधिकारियों का कहना है कि पतंजलि का दावा ग्राहकों को गुमराह करने वाला है. अधिकारियों ने स्वयं संज्ञान लिया और कंपनी पर कार्रवाई की है.

संयुक्त आयुक्त शशिकांत केकरे ने कहा कि अभी सिर्फ खाद्य तेलों पर कार्रवाई की गई है. पतंजलि के साथ अभी इमामी का मामला ध्यान में आया है. अधिकारियों को बाजार में ड्राइव लेने को कहा गया है और यह देखने को कहा गया है कि और कौन-कौन सी कंपनियां इस प्रकार का दावा कर रही है. सभी को नोटिस भेजा जाएगा. उन्होंने कहा कि इस वक्त माल की जब्ती नहीं की गई है, क्योंकि माल को लेकर कोई शिकायत नहीं है, लेकिन जिन टीनों पर दावे किए जा रहे हैं, वैसे माल को बाजार से वापस लेने की बात कंपनियों को कही गई है. फूड से‌फ्टी अधिकारी रविराज धबार्डे को वर्धा में किसी ग्राहक ने इसकी जानकारी दी थी. यह मामला संयुक्त आयुक्त केकरे के पास है. अगर कंपनी का दावा झूठा पाया जाता है तो कंपनी पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है. कंपनियां अगर अपनी गलती सुधार लेती है, तो वह कार्रवाई से बच सकती है.

केकरे का कहना है कि खाद्य तेलों का उत्पादन विभिन्न प्रकार के वेजिटेबल (अन्न) से किया जाता है, ऐसे उत्पादों में केलेस्ट्राल होता ही नहीं है. इसलिए कंपनियां मार्केटिंग के लिए इस प्रकार का दावा नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि कोलेस्ट्राल की मात्रा उन्हीं चीजों में पाई जाती है, जो जानवर आधारित होते हैं. जैसे डेयरी उत्पाद, मीट आदि में कोलेस्ट्राल बड़े पैमाने पर मिल जाता है. इसलिए प्रचार में जो दावा किए जा रहे हैं, वह सरासर गलत है. सारी की सारी कंपनियों को इसमें सुधार लाना होगा. उन्होंने कहा कि धारा 2.4.2 (1) पैकेजिंग एवं लेबलिंग के तहत कार्रवाई की गई है. हमारा प्रयास है कि सारी कंपनियों को लेबल प्लेइंग फील्ड मिले और कोई भी कंपनी ग्राहकों को गुमराह न करे.

बाबा का दावा
वर्तमान में भले ही पतंजलि के खाद्य तेलों पर कार्रवाई की गई है, परंतु बाबा टीवी पर अन्य कई खाद्य तेलों पर अलग-अलग प्रकार से दावा करते हुए देखे जा सकते हैं. इसके बाद बाबा के अन्य उत्पादों पर भी विभाग की टेढ़ी नजर पड़ सकती है. बाबा बिस्टिक, आटा, दवाइयों, शैम्पू आदि के प्रचार में भी अपने उत्पाद को श्रेष्ठ बताने के चक्कर में दूसरी कंपनियों पर आरोप लगाते हुए देखे जा सकते हैं. अब इन सब पर लोगों की नजरें टिक गई हैं. लोगों का भरोसा कायम रखने के लिए अक्सर कंपनियां इस प्रकार का दावा करते हुए देखी जा सकती है.

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