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प्रदूषण से लोगों का जीना दूभर

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घुग्घुस. चंद्रपुर-नागपुर मार्ग पर यशवंतनगर के पास शाम कांटे के पीछे स्थित कोयला प्लॉट से बड़े पैमाने प्रदूषण फैलाया जा रहा है. मार्ग से आवागमन करनेवाले लोगों का जीना दूभर हो गया है. नियमों की पूरी तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही है. प्रदूषण नियंत्रण मंडल मूकदर्शक बना है.

कोल प्लांट ने बढ़ाई परेशानी
उल्लेखनीय है कि पडोली व लखमापुर मंदिर परिसर में इससे पूर्व सैकड़ों की संख्या में कोयला प्लॉट थे. जिनके प्रदूषण ने लोगों के स्वास्थ्य पर काफी गंभीर परिणाम ला दिया था. विभिन्न बीमारियों की चपेट में आये लोगों की परेशानियों को जिला प्रशासन ने काफी गंभीरता से लिया. सभी कोयला प्लाटो को पडोली से अन्यंत्र स्थानांतरित कर दिया गया. कुछ कोयला प्लाट पडोली घुग्घुस रोड पर नागाडा के पास स्थानांतरित किए गए. कुछ प्लाट अंतुर्ला फाटा के पास स्थानांतरित हुए. इसके चलते पडोली, लखमापुर क्षेत्र में प्रदूषण का प्रमाण काफी कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली थी, किंतु कुछ समय बाद इस क्षेत्र में कोल प्लांट स्थापित होने लगे है. जिसमें चंद्रपुर-नागपुर मार्ग पर यशवंतनगर के पास शाम कांटे के पीछे स्थित कोयला प्लांट का भी समावेश है.

प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों की कोताही से कोयला प्लाट संचालक को अपना कारोबार विस्तार करने का अवसर मिल गया. कोयला खदानों से लाया गया कोयला मशीनों के माध्यम से ट्रकों में लोडिंग और अपलोडिंग किया जाता है. जिससे चारों और कोयले की धूल भरा वातावरण निर्माण हुआ नजर आता है. प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने कुछ नियम निर्धारित किए है. जिसमें कोल प्लाट को बड़े तिरपाल से ढककर रखा जाना चाहिए. कोयले की लोडिंग और अपलोडिंग के समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोयले की धूल न उड़े इसके लिए पानी का छिड़काव किया जाता है.

नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां
सरेआम नियमों को ताक पर रखकर कोयले की प्रतिदिन लोडिंग और अपलोडिंग हो रही है. रोड के किनारे स्थित इस कोल प्लाट के कारण कोयले की उड़ती धूल सड़क तक पहुंचती है. गंभीर समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन पूर्व की तरह फिर से गंभीरता का परिचय देते हुए इस कोल प्लाट को अन्यंत्र स्थानांतरित करने की मांग गई है.

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