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कंडक्टर मालामाल, मनपा कंगाल

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नागपुर. मनपा के लिए हर वर्ष आर्थिक संकट होना भले ही कोई नई बात न हो, लेकिन आर्थिक संकट से निपटने के लिए कई उपाय होने के बावजूद कोई कारगर कदम नहीं उठाए जाने से ही स्थिति से निपटने में नाकामी ही हाथ लगी है. इसका एक उदाहरण यह भी है कि शहर बस सेवा का संचालन अपनी ओर लेने के बाद मनपा को हर वर्ष करोड़ों का घाटा सहन करना पड़ रहा है. हर वर्ष 100 करोड़ से अधिक परिवहन विभाग के लिए अलग से वित्तीय प्रावधान करना पड़ रहा है, जबकि परिवहन व्यवस्था संभालने के लिए 3 स्तर पर प्रणाली तैयार की गई. आपरेटर पर ध्यान रखने के लिए डिम्स कम्पनी और इन दोनों पर नजर रखने के लिए परिवहन विभाग में अधिकारियों की टीम रखी गई. इतना पुख्ता इंतजाम करने के बाद भी जहां मनपा कंगाल हो रही, वहीं कुछ कंडक्टर मालामाल होते जा रहे हैं.

83 रूट्स, 68 चेकर्स
मनपा की ओर से निर्धारित की गई परिवहन व्यवस्था के अनुसार 83 रूट्स निर्धारित किए गए. जिन पर बसों की हजारों फेरियां प्रतिदिन लगाई जा रही हैं. इन रूट्स पर चलनेवाली बसों की नियमित चेकिंग के लिए डिम्स कम्पनी को दी गई जिम्मेदारी के अनुसार कम्पनी द्वारा 68 चेकर्स नियुक्ति का दावा किया जा रहा है. चेकर्स की सतर्कता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ दिनों पहले परिवहन विभाग की ओर से स्वयं बसों की जांच का सिलसिला शुरू करने के बाद प्रतिदिन 22 लाख रु. की निधि जमा हो रही थी. लेकिन आचार संहिता के बाद विभाग के पदाधिकारियों पर अंकुश लग जाने से अब प्रतिदिन 13 से 14 लाख रु. की निधि जमा हो रही है. इसी तरह से प्रतिदिन मनपा को लगभग 8 लाख का नुकसान हो रहा है, जो प्रतिमाह 2.40 करोड़ का है. विशेषत: इन दिनों में बसों से यात्रियों की संख्या में कोई बड़ा अंतर नहीं पड़ा है.

3 चेकर्स को निलम्बित करने के निर्देश
सूत्रों के अनुसार लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए हाल ही में परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों की ओर से चेकर्स के कामकाज का जायजा लेने का प्रयास किया गया. एक बस रूट पर किए गए औचक निरीक्षण में जैसे ही छापामारी की गई, वहां चल रही गड़बड़ी उजागर होते ही चेकर्स कामकाज छोड़कर भाग खड़े हुए, जिसके बाद इन 3 चेकर्स को निलम्बित करने की सिफारिश प्रशासन से की गई. अधिकारियों का मानना है कि डिम्स कम्पनी को काफी पहले से चेकर्स की सूची मांगी जा रही है, लेकिन विभाग को मुहैया नहीं कराई गई जिससे कम्पनी की ओर से जितने चेकर्स होने का दावा किया जा रहा है, उसी पर संदेह है. इसके अलावा यदि चेकर्स संजीदगी से कार्य करें, तो बिना टिकट की समस्या खत्म होने से इंकार नहीं किया जा सकता है.

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