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हृदय की बीमारी से ग्रस्त हैं 45 बच्चे

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अकोला. जिले में 1 दिन से 18 वर्ष तक के आयुवाले बच्चों में जन्मतर हृदय की बीमारी का प्रमाण बढ़ता जा रहा है. यह बात राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत किए गए सर्वे के दौरान सामने आयी . पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रथम चरण में किए गए सर्वे में 45 बच्चों में हृदय की बीमारी का पता चला है.

दूसरा चरण 22 को
दूसरे चरण की जांच पड़ताल 22 दिसंबर को होगी, जिसमें लगभग 130 से अधिक हृदय की बीमारी से पीड़ित बच्चों की जांच की जाएगी. बच्चों के स्वास्थ्य के लिये 2013 से स्कूली बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी जांच पड़ताल की जा रही है. स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिला स्तर पर अकोला जिले की सभी शालाएं एवं आंगनवाड़ियों में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है.

15 बच्चों की मुंबई में हुई शल्यक्रिया
जिसमें इस वर्ष प्रथम चरण में 45 बच्चे हृदय विकार से पीड़ित पाए गए और इनमें से 15 बच्चों की शल्यक्रिया मुंबई के अस्पताल में सफलतापूर्वक की गयी. शेष बच्चों की शल्यक्रिया की तैयारी शुरू है. द्वितीय चरण में हृदय विकार से पीड़ित 130 बच्चों की टूडी ईको जांच की जाएगी.

सन 2013 – 14 से सन 2018 – 19 तक के प्रथम चरण में कुल मिलाकर स्वास्थ्य जांच के दौरान शल्यक्रिया के लिये पात्र 383 बच्चों की शल्यक्रिया की गई है. जबकि 251 बच्चों की प्रत्यक्ष सर्जरी की गयी है. प्रमुखता से जेनेटिक्स समस्याओं के कारण बच्चों के जन्म लेते ही हृदय में छेद होना या हृदय से संबंधित अन्य समस्याएं निर्मित होने से हृदय की बीमारी धीरे – धीरे बढ़ती जाती है. डॉक्टरों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को रुबेला होने पर भी बच्चों को जन्मतर हृदय विकार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

गर्भवती महिलाओं की होनी चाहिए संपूर्ण जांच
गर्भवती महिलाओं को गलत औषधिपचार, मधुमेह रहने पर भी यह समस्या बच्चों में आ सकती है. डॉक्टरों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को संपूर्ण स्वास्थ्य जांच करनी चाहिए, बीमार पड़ने पर डॉक्टरों की सलाह से ही औषधि लेनी चाहिए, सोनोग्राफी द्वारा गर्भवती महिला व बच्चे के हृदय की जांच करना आवश्यक है. इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को पूरी तरह से पोषक आहार लेना चाहिए. इस संदर्भ में अकोला जिला शल्य चिकित्सक डा. आरती कुलवाल ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत ऐसे मरीज जो सामने आ रहे है, उन पर उपचार शुरू है. गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है.

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