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भूपेश बघेल ने ली छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ, राहुल गांधी सहित कई बड़े नेता मौजूद

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भूपेश बघेल  छत्तीसगढ़ के तीसरे मुख्यमंत्री बन गए हैं. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल  ने उन्हें पद और गोपनियता की शपथ दिलाई. भूपेश बघेल  राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री हैं.

 

नई दिल्ली: भूपेश बघेल  छत्तीसगढ़ के तीसरे मुख्यमंत्री बन गए हैं. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल  ने उन्हें पद और गोपनियता की शपथ दिलाई. भूपेश बघेल राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री हैं. भूपेश बघेल के अलावा कांग्रेस नेता टी एस सिंह देव और वरिष्ठ कांग्रेस नेता ताम्रध्वज साहू ने भी मंत्री पद की शपथ ली. भूपेश बघेल के शपथग्रहण समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा, मल्लिकार्जुन खड़गे, पीएल पुनिया, पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह सहित कई बड़े नेता मौजूद थे. इससे पहले रविवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस प्रमुख भूपेश बघेल ने विधायक दल का नेता चुने जाने पर राजभवन जाकर सरकार गठन का दावा पेश किया था. राज्यपाल के प्रतिनिधि के तौर पर राज्यपाल के सचिव सुरेंद्र कुमार जायसवाल ने बघेल का दावापत्र ग्रहण किया. उसके बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 17 दिसंबर को भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया था. बता दें कि 1 नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन होने के बाद अजीत जोगी वहां पहले मुख्यमंत्री बने थे. वह 9 नवंबर 2000 से 6 दिसंबर 2003 तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद पर रहे. इसके बाद बीजेपी के रमन सिंह 7 दिसंबर 2003 को राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री बने और लगातार तीन बार इस पद पर बने रहे. इस बार बीजेपी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा और बीजेपी के 15 साल के शासन का अंत हुआ.

कौन हैं भूपेश बघेल
छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं. कद्दावर नेता माने जाते हैं. संगठन पर मजबूत पकड़ के चलते भूपेश बघेल का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए फाइनल हुआ था. बघेल रमन सिंह सरकार के खिलाफ हमेशा बिगुल फूंकते रहे. इसके चलते कई बार मुकदमों में भी फंसे, मगर डिगे नहीं. भूपेश बघेल का जन्म 23 अगस्त 1961 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन तहसील में हुआ. कुर्मियों में इनका अच्छा जनाधार माना जाता है. मुख्यमंत्री चयन में कुर्मी जनाधार भी इनके लिए प्लस प्वाइंट रहा.

1985 में कांग्रेस से जुड़े
1985 से कांग्रेस से जुड़कर राजनीति कर रहे हैं. पहली बार 1993 में विधायक बने थे. मध्यप्रदेश की दिग्विजय सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं. वर्ष 2000 में अजित जोगी सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रहे. बघेल ने इस बार विधानसभा चुनाव में संगठन में गुटबाजी को काफी कम करने में अहम भूमिका निभाई. राज्य का एक धड़ा उन्हें सीएम के रूप में देखना चाहता था.

अजीत जोगी को बाहर का रास्ता दिखाया
भूपेश बघेल को ऐसे वक्त में नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली, जब राज्य में कांग्रेस के बड़े नेताओं का अभाव था. झीरम घाटी में अपने बड़े नेताओं की मौत के बाद बघेल ने कांग्रेस को नेतृत्व संकट से निकाला. एक समय बीजेपी की बी टीम कही जाने वाले अजीत जोगी  और उनके बेटे अजीत जोगी तक को उन्होंने पार्टी के बाहर का रास्ता दिखा कर अपने रुख से स्पष्ट कर दिया था कि वह कांग्रेस को मजबूत करने में किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे.

बघेल ने नेतृत्वविहीन हो चुकी कांग्रेस में जान फूंकी
भूपेश बघेल ने झीरम घाटी में अपने बड़े नेताओं की मौत के बाद बघेल ने कांग्रेस को नेतृत्व संकट से निकाला. विधानसभा चुनाव से पहले बघेल ने प्रदेश के कई हिस्सों में पदयात्रा की, कार्यकर्ताओं को जोड़ा, कांर्यकर्ताओं में जान फूंकी और रमन सरकार के खिलाफ में हवा बनाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरा. जब एक वक्त लग रहा था कि रमन सिंह सरकार आसान से सत्ता से बाहर नहीं हो पाएगी, ऐसी स्थिति में उन्होंने सरकार के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद कर कार्यकर्ताओं में जोश भरा.

सेक्स स्कैंडल में नाम आने के बाद भी डंटे रहे
चुनाव से पहले बीजेपी के मंत्री राजेश मूणत से जुड़ी एक कथित सेक्स सीडी के मामले में भूपेश बघेल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया, तब उन्होंने जमानत लेने से इनकार कर दिया. सेक्स कांड में नाम आने के बाद भी भूपेश का मनोबल नहीं टूटा और वह राजनीति की बिसात पर डंटे रहे.

 

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