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बाघ के 3 शावकों की मौत

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चंद्रपुर. चांदाफोर्ट-गोंदिया रेल मार्ग पर गुरुवार की सुबह बाघ के 3 शावकों की ट्रेन से कटकर मौत हो गई. यवतमाल जिले में अवनी नामक बाघिन के शूट आउट का मामला अभी भी चर्चाओं में है. ऐसे में बाघ के 3 शावकों की इस मौत ने वन विभाग को फिर सुर्खियों में ला दिया है. बाघ के शावकों की ट्रेन के चपेट में आकर मौत की घटना महाराष्ट्र वन विकास महामंडल के चिचपल्ली क्षेत्र में लोहारा-चिचपल्ली के बीच हुई. मृत बाघ शावकों के शव रेलवे लाइन के पोल नंबर 1232 के पास देखे गए. इन बाघ शावकों की आयु 6 से 8 माह के बीच है. इनमें से 2 शावक पटरी पर और एक शावक कुछ दूरी पर मिला.

बाघिन के दहाड़ने की आवाजें
पटरी के पास 2 बाघ शावकों के अलावा एक बाघ का पैर कटा हुआ मिला. इसके बाद वन कर्मियों की टीम ने आसपास का क्षेत्र खंगाला, तो घटनास्थल से 500 मीटर दूरी पर बगैर सिर के शावक का धड़ मिला. वन विभाग का अनुमान है कि बाघिन इस शावक को खींचते हुए अंदर लेकर गई होगी. इन शावकों की मां बाघिन भी आसपास एक शावक के साथ होने का अनुमान है. पास ही जंगल से काफी तेज दहाड़ने की आवाजें आ रही हैं. साथ ही आसपास जोरदार कालिंग हो रही है. जब भी बाघ मौजूद हो, तो जंगल के अन्य जानवर जोरों से चिल्लाते हैं, जिसके चलते बाघ के वहां होने का अंदाज हो जाता है. बाघिन भी घायल होकर तड़प रही है या फिर बच्चों के विरह में तड़प रही है इस बारे में अभी कुछ भी कह पाना मुश्किल है.

आधे घंटे रुकी रही ट्रेन
गुरुवार की सुबह 7.30 बजे चांदाफोर्ट से गोंदिया की ओर जा रही पैसेजर ट्रेन के चालक शेख को बाघों के शावक पटरी पर दिखे. उन्होंने केलझर रेलवे स्टेशन पर इसकी जानकारी दी. जहां आधे घंटे तक ट्रेन खड़ी रही. ट्रेन चालक का बयान लिया गया. घटना की सूचना मिलते ही सुबह 8 बजे घटनास्थल पर वरिष्ठ वन अधिकारी तथा एफडीसीएम के अधिकारी पहुंचे. इन अधिकारियों में एफडीसीएम उत्तर चांदा के महाप्रबंधक ऋषिकेश रंजन, मुख्य वनसंरक्षक रामा राव, अशोक सोनकुसरे, पी.आर. धावडा, विभागीय वन अधिकारी आदि का समावेश था. अधिकारियों और वनकर्मियों की टीम ने वहां पहुंचकर आसापस बाघिन की तलाश भी शुरू कर दी. तीनों शावकों का डा. कडूकर, डा. कुंदन पोडशेलवार, डा. बावणे ने पंचनामा किया और वहीं देर शाम को उन्हें वहीं जला दिया गया.

तलाशी अभियान में जुटा वन विभाग
शावकों की आयु को देखते हुए बाघिन की तलाश में यहां निगरानी बढ़ा दी गई है. वन अधिकारियों के अनुसार तीनों शावक मादा थे. इस घटना से वन विभाग में खलबली मची हुई है. आसपास 20 कैमरे लगाये गए हैं और 15 वन अधिकारी एवं वनकर्मियों की टीम बाघिन की तलाश के लिए तैनात कर दी गई है. यह क्षेत्र लोहारा गांव के पिछले हिस्से में है. यहां लोहारा ग्रामीणों का आवागमन होता है. बाघिन के काफी आक्रमक होने का अंदाजा है. ऐसे में लोगों को क्षेत्र में अकेले जाने की सख्त ताकीद वन विभाग द्वारा की जा रही है.

पहले भी हो चुकी है घटना
इस मार्ग पर यह पहली घटना नहीं है. इससे पूर्व भी कई बार रेल मार्ग पर ट्रेन की चपेट में आने से बाघ, तेंदुए, भालू समेत अन्य जीवों की मौतें हो चुकी हैं. दरअसल चांदाफोर्ट-गोंदिया रेल मार्ग व्यस्ततम रेल मार्ग है. इस रेल मार्ग से कई सुपरफास्ट गाड़ियों की आवाजाही होती है. रेल मार्ग वनाच्छादित क्षेत्र से होकर गुजरता है. इसलिए यहां वनों के एक छोर से दूसरे छोर के लिए वन्य प्राणियों का लगातार आवागमन होता है. जिस स्थान पर यह घटना हुई है वह लोहारा, जूनोना जंगल का क्षेत्र है. जहां बाघ, तेंदुआ, भालू, नीलगाय, जंगली सुअर, हिरन आदि वन्यजीव नियमित रूप से रेल मार्ग के आसपास ही विचरण करते हुए नजर आते हैं. ट्रेन की चपेट में आने से वन्यजीवों की जान का खतरा हमेशा बना रहता है. वनक्षेत्र से गुजरते हुए ट्रेन की स्पीड कम रखने की मांग वन्य प्रेमियों द्वारा निरंतर की जाती है, परंतु इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता है. इस घटना से वन्यजीव प्रेमी काफी क्षुब्ध है. इस क्षेत्र में सड़क मार्ग और रेल मार्ग पर आये दिन वन्यजीवों के वाहनों और ट्रेनों के चपेट में आने से घायल होने की घटनाओं ने वन्यजीव प्रेमियों को विचलित किया है. बाघों की बहुतायत में उपस्थिति के लिए समूचे राज्य में चंद्रपुर का नाम शुमार है. यवतमाल में आतंक मचानेवाली अवनी बाघिन को शूट आउट किए जाने की घटना को लेकर वन्यजीव प्रेमियों में पहले ही काफी रोष व्याप्त है.

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