Home विदर्भ अमरावती अघोषित लोडशेडिंग से किसान परेशान

अघोषित लोडशेडिंग से किसान परेशान

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चांदूर बाजार. तहसील में की जा रही अघोषित लोडशेडिंग से किसान परेशान है. पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान अपनी फसलों को सिंचाई से बचाने का प्रयास कर रहा है. लेकिन बिजली कटौती उनके इन प्रयासों पर भी पानी फेर रही है. नमी के आभाव में संतरा फलों के गलकर गिरने लगे हैं जिससे व्यापारी वर्ग संतरा खरीदी करने की जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं है. सरकार ने 8 घंटे कृषि पंपों को बिजली देकर जलापूर्ति की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था.

केवल 4 घंटे बिजली
लेकिन लोडशेडिंग के कारण केवल 4 घंटे ही सिंचाई की व्यवस्था हो पा रही है. फसलों के लिए यह पर्याप्त नहीं होने से उनकी स्थिति दयनीय हो चुकी है. पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कम बारिश होने से पूर्णा बांध का जलस्तर बढ़ नहीं सका. कुओं का जलस्तर काफी ऊंचा चला गया. इन हालातों में किसान रतजगा कर खेतों में सिंचाई कर फसलों को बचाने के प्रयास में जुटा हुआ है. लेकिन उसके ये सारे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे है.इस वर्ष भी फसलों की लागत निकलना मुश्किल दिखाई दे रहा है. इतने खराब हालातों के बावजूद चांदूर बाजार तहसील को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है.बिजली की आंखमिचौली से परेशान किसानों ने सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की मांग शासन प्रशासन से की है.

सप्ताह में 3 दिन बिजली गुल
किसान प्रशांत चर्जन ने कहा कि किसान हमेशा मिट्टी से संघर्ष कर फसलें उगाता है. उसे समय पर बिजली और सिंचाई के लिए पानी मिलना अपेक्षित है. लेकिन सप्ताह में चार दिन रात में बिजली मिलती है. इसकी वजह से वह अपने खेतों की ठीक ढंग से सिंचाई नहीं कर पा रहा. सरकार को किसानों की इस समस्या की ओर ध्यान देने की जरूरत है.

दिन में 8 घंटे बिजली दें
किसान नंदकिशोर कविटकर ने कहा कि सिंचाई के लिए पूर्णा प्रकल्प से पानी छोडने का नियोजन नहीं होने से कुओं के पानी पर संतरा बागानों और रबी फसलों का भविष्य निर्भर है. इसके लिए महावितरण कंपनी रात की बजाय दिन में 8 घंटे किसानों को बिजली दें. इसका कारण यह है कि सिंचाई के लिए रात में मजदूर नहीं मिलते हैं.

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