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केरोसिन पर चलाए जा रहे आटोरिक्शे

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अकोला. त्यौहार के दिनों में यातायात समस्या ने गंभीर रुप धारण कर लिया है. लेकिन यातायात पुलिस मूक दर्शक बनकर रह गयी है. कई बार तो ऐसा लगता है, कि यातायात पुलिस और आरटीओ अकोला में है भी या नहीं. आटो रिक्शे नियम तथा कानून को ताक पर रखकर चलाये जा रहे हैं. कुछ ही आटो रिक्शे ऐसे होंगे जो सिर्फ तीन सवारियां बैठाते होंगे. अधिकतर आटो रिक्शे में सवारियां बैठी हुई कम लटकी हुई अधिक दिखाई देती हैं. जिससे दुर्घटनाएं बढ़ी है.यह आटोरिक्शे शहर के सभी मुख्य मार्गो पर सवारियां लटकाए हुए निकलते हैं. पुराना शहर पुलिस स्टेशन, सिटी कोतवाली, सिविल लाइन, खदान तथा अकोट फैल पुलिस स्टेशनों के सामने से बेखटके निकलते हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी देखती रहती है. पहले लोग डरते थे लेकिन अब ऐसा दिखाई नहीं देता.

बिना इंडीकेटर मोड़ते हैं वाहन
आटो रक्शिा चालक एक छोटी बोतल में पेट्रोल रखते है, आटो रिक्शा शुरु करने के लिए थोड़ा पेट्रोल कार्बोरेटर पर डालकर आटो शुरू कर लेते हैं. फिर वह केरोसिन पर दिन भर काला धुआं छोड़ते हुए भागता रहता है.

बहुत कम आटोरिक्शें ऐसे होंगे जिनके इंडीकेटर शुरू हैं. बिना साईड दिये कहीं भी मुड़ जाना कहीं भी सवारी दिखते ही बीच सड़क पर रुक जाना, तेज गति से आटो रक्शिा चलाना आटो रक्शिा चालकों की आदत में शुमार है. अकोला में यातायात समस्या गंभीर बनती जा रही है. सर्वाधिक यातायात पुलिस कर्मियों की ड्यूटी हुतात्मा चौक तथा टावर चौक पर है और यातायात समस्या भी यहां दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है. टावर चौक पर एलआईसी कार्यालय की ओर जानेवाले मार्ग पर बीच सड़क पर आटोरिक्शे सवारियां बैठाते हैं. लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं है.

लोडशेडिंग से लोग परेशान
महावितरण ने एक बार फिर लोड़शेडिंग का शुभारंभ कर दिया है. जिससे लोगों के हाल बेहाल हो रहे हैं. बिना किसी पूर्व सूचना के एमरजेंसी लोडशेडिंग के नाम पर बिजली पूर्ति बंद कर दी जाती है. जिसके कारण शिक्षा, उद्योग, व्यापार, स्वास्थ्य, कृषि आदि सभी क्षेत्रों में लोगों को तकलीफ का सामना करना पड़ता है. वर्तमान समय में अत्याधुनिक सभी सुख सुविधाएं बिजली पूर्ति पर निर्भर हैं.

सिंचाई करने में आती है दिक्कत
अब रबि फसल का समय है. इस समय किसानों को सिंचाई के लिए कृषि पम्प चलाने पड़ते हैं. पहले ही जिले में सिंचाई के साधन नहीं के समान हैं. उस पर अब महावितरण की लोड़शेडिंग इस कारण किसानों के भी हाल बेहाल हो रहे हैं. एमरजेंसी लोड़शेडिंग के कारण कभी भी बिजली गुल हो जाती है. सरकार का काम है कि वह लोड़शेडिंग पर रोक लगाए जिससे महानगर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में किसान तथा अन्य लोग राहत की सांस ले सकें.

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