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गोसी प्रकल्पग्रस्तों का आमदार निवास पर कब्जा

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नागपुर. अपने आक्रामक आंदोलनों के लिए चर्चित प्रहार संगठन के अध्यक्ष व विधायक बच्चू कडू के नेतृत्व में गोसीखुर्द प्रकल्पग्रस्तों ने सैकड़ों की संख्या में विधायक निवास में ठिया आंदोलन किया. यहां से प्रकल्पग्रस्तों की विविध समस्याओं के त्वरित निदान की मांग को लेकर किसानों का मोर्चा विभागीय आयुक्त कार्यालय तक निकाला जाना था जिसके चलते वहां भी पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त किया गया था. प्रकल्पग्रस्तों ने विधायक निवास की छत पर चढ़कर ठिया आंदोलन किया वहीं इमारत के दरवाजे पर ताला ठोक दिया. कई कमरों में भी प्रकल्पग्रस्त किसानों ने कब्जा जमा कर विरोध प्रदर्शन किया. आंदोलनकारियों की मांग थी कि जब तक प्रशासन की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा. सैकड़ों की संख्या में नागपुर, भंडारा, गोंदिया से पहुंचे प्रहार गोसीखुर्द प्रकल्पग्रस्त संघर्ष समिति के किसानों ने विधायक निवास के सामने बने लॉन पर भी कब्जा जमाया. इमारत की छत पर खड़े होकर नारेबाजी भी की गई.

पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त
बच्चू कडू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रकल्पग्रस्तों के उपराजधानी पहुंचने पर विधायक निवास व विभागीय आयुक्त कार्यालय में पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त किया गया था. विधायक निवास को तो पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था. किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर गिरफ्तारी की पूरी तैयारी कर ली गई थी. दर्जन भर पुलिस वाहन निवास के सामने रोड पर खड़े थे. आलाधिकारी स्वयं हालात पर नजर रखे हुए थे. प्रशासन की ओर से आंदोलनकारियों से बातचीत करने का प्रयास जारी था लेकिन प्रकल्पग्रस्तों ने कहा कि जब तक ठोस निर्णय नहीं होता आंदोलन जारी रहेगा. खबर लिखे जाने तक प्रकल्पग्रस्तों ने विधायक निवास में अपना कब्जा जमाये रखा था.

30 वर्षों से संघर्ष : कडू
बच्चू कडू ने कहा कि पिछले 30 वर्षों से प्रकल्पग्रस्त न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हाथों 22 अप्रैल 1988 को गोसीखुर्द का उद्घाटन किया गया था. 30 वर्ष बीत गए और अभी भी 85 गांवों के पुनर्वसन की समस्या प्रलंबित है. हर वर्ष सरकार के दरबार में प्रकल्पग्रस्त अपनी समस्या रखते हैं लेकिन न्याय नहीं मिल सका. किसानों को पर्यायी जमीन तो मिली लेकिन वह दूर होने से किसान उसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. प्रकल्पग्रस्तों की अन्य अनेक समस्याएं हैं. प्रकल्प में पानी जमा करने से कई गांवों में पानी घुसने का खतरा पैदा हो गया है. कडू ने कहा कि पहले पुनर्वसन करो फिर बांध पूरा करो. उन्होंने नियमबाह्य तरीके से बांध में जमा पानी किये जाने का विरोध करते हुए पानी छोड़ने की मांग की ताकि किसी गांव में पानी न भरे. प्रकल्पग्रस्तों को नौकरी या 25 लाख रुपये मुआवजा देने, शेष खेती का नये भूसंपादन कानून के अनुसार संपादन करने और मुआवजा देने, सीएम द्वारा अप्रैल महीने में पुर्नवसन के संदर्भ में दिये गए 10 निर्देशों को अमल में लाने की मांग की गई.

किसी गांव का संपर्क नहीं टूटा
इधर, संबंधित विभाग के अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, गोसीखुर्द में स्टाक किये गए पानी के चलते किसी भी गांव का संपर्क नहीं टूटा है. उन्होंने बताया कि डेम की क्षमता 245.50 मीटर पानी संचय की है. वर्तमान में 243.85 मीटर स्टाक है इसलिए डेम से पानी कम करने की जरूरत नही है. नागपुर जिले में किसी गांव का रास्ता बंद नहीं हुआ है. भंडारा जिले में मात्र जाख, कवडसी, इटगांव, निमगांव, परसोडी गांव के रास्ते बाधित हुए हैं लेकिन इन गांवों के लिए पर्यायी मार्ग उपलब्ध हैं. प्रकल्प में पूर्ण जलसंचय स्तर तक बाधित होने वाले गावठान व खेत जमीन संपादित की गई है. भंडारा जिले के तिड्डी गांव में बाधित 9 घरों को संपादित किया गया है. अधिकारी के अनुसार, प्रकल्प के लिए जो जमीन संपादित की गई वहां बुआई नहीं करने के संदर्भ में सभी ग्राम पंचायतों व प्रकल्पग्रस्तों को सूचना दी गई थी लेकिन इसके बावजूद प्रकल्पग्रस्तों ने बड़े पैमाने पर बुआई की. परिणामस्वरूप संपादित जमीन की फसलों में पानी भर गया है. अब बांध का पानी कम करने की मांग की जा रही है जो संभव नहीं है. संपादित जमीनों के अलावा कहीं भी पानी नहीं घुसने की जानकारी दी गई. इसी तरह 8 किमी से अधिक अंतर की खेती के संपादन का प्रस्ताव सितंबर में सरकार को दिया गया है. भिवापुर के पास थुटानबोरी में 13.32 हेक्टेयर जमीन संपादन के लिए मांग के अनुसार प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है

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