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ताड़ोबा के बाघ का देवली में डेरा

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देवली. ताडोबा से निकले बाघ ने रविवार तक 180 से 190 किलोमीटर का फासला तय किया है. फिर भी बाघ देवली तहसील में अपना डेरा जमाए बैठा है. अपने सफर में उसने सबसे अधिक समय एकपाला परिसर में गुजारा है. अब नागझरी को छोड़ बाघ पुलगांव डिपो (सीएडी कैम्प) की ओर जा रहा है. डिपो का परिसर बड़ा तथा सैनिक क्षेत्र होने के कारण वनविभाग की मुश्किलें बढ़ गई है. बाघ का तहसील में मुक्त विचरण होने के कारण मजदूर और किसानों में भय का वातावरण है.

3 दिन से नहीं किया शिकार
गत तीन दोनों से उसने कोई शिकार नहीं किया है. प्रतिदिन बाघ को लेकर अफवाहें बड़े पैमाने पर फैलाई जा रही है. जिले में गत 10 दिनों से बाघ का मुक्त विचरण शुरू रहने के बाद भी उसे कैद करने के लिए वनविभाग ने कोई कदम नहीं उठाए हैं. उपवनसंरक्षक कार्यालय ने बाघ के संदर्भ में सभी जानकारी वरिष्ठ कार्यालय को भेजी है किंतु वरिष्ठों से कोई आदेश नहीं मिलने से वनाधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे है. वनरक्षक दिन-रात बाघ पर अपनी नजर बनाए हुए है. बाघ ने किसी इंसान पर अब तक हमला नहीं किया है. 4 दिन पूर्व एकपाला गांव में उसने बैल का शिकार किया था.

कैम्प की सीमा पर सुरक्षा का घेरा
उल्लेखनीय है कि सीएडी कैम्प का परिक्षेत्र काफी बड़ा है़ सुरक्षा की दृष्टि से पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे से घेरा गया है. साथ ही सैनिक सुरक्षा के लिए तैनात रहते है. रात के समय सैनिक गश्त लगाते है. सुरक्षा घेरा होने के कारण बाघ को सीएडी की सीमा में प्रवेश करते समय कठिनाइयां आ सकती है. ऐसे में बाघ अन्य क्षेत्र की ओर रुख कर सकता है. नागझरी से 3 से 4 किमी की दूरी पर रेल लाइन है़ ऐसे में बाघ रेल लाइन की ओर जाने की संभावना भी बढ़ गयी है.

कैद करने के प्रयास शुरू : बढेकर
बाघ को कैद करने के लिए हमारे प्रयास शुरू है. अब वरिष्ठों के आदेश की हम प्रतीक्षा कर रहे है़ ऐसी जानकारी सहायक वनसंरक्षक बढेकर ने दी.

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