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छोटे प्रकल्पों में 40 प्रश जल

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गोंदिया. जिले में सिंचाई सुविधा की दृष्टि से बड़े, मध्यम व लघू प्रकल्प है. इसके माध्यम से खेती की सिंचाई व नागरिकों को पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध होती है. जिले में खरीफ मौसम के दौरान मिनीमम 1,300 मिमी. बारिश होना अपेक्षित है लेकिन इस बार 1,000 मिमी. ही बारिश हुई है. यह गत वर्ष की तुलना में 300 मिमी. अधिक है. इसी अवधि में पिछले वर्ष मध्यम प्रकल्प में 20.31 प्रश. जलसंग्रह उपलब्ध था. जबकि वर्तमान स्थिति में 39.87 प्रश.जलसंग्रह उपलब्ध है.

30 प्रश बारिश अधिक
वहीं गत वर्ष लघु प्रकल्प में 28.86 प्रश. जलसंग्रह था. जिले में वर्तमान में 40.42 प्रश.जल उपलब्ध है. जिले में सिंचाई सुविधा की दृष्टि से बोदलकसा, चोरखमारा, चुलबंद, खैरबंदा, मानागड, रेंगेपार, संग्रामपुर, कटंगी, कलपाथरी इस तरह कुल 9 मध्यम प्रकल्प व अक्काटोला, भदभद्या, डोंगरगांव, गुमडोह, हरी कालीमाती, सोनेगांव, सालेगांव, सेरपार, बडेगांव, जुनेवानी, उमरझरी, ओवारा, बेवारटोला इस तरह 22 लघु प्रकल्प हैं. इस बार खरीफ मौसम में गत वर्ष की तुलना में 30 प्रश.बारिश अधिक हुई है. जिससे जलाशय, मध्यम व लघु प्रकल्पों में पानी संग्रह अधिक दिखाई दे रहा है. जिले में गत वर्ष 9 मध्यम प्रकल्पों में 11 अक्टूबर तक 20.31 प्रश. जलसंग्रह था. वहीं वर्तमान में जिले के मध्यम प्रकल्पों में 39.87 प्रश.जलसंग्रह है. इसी तरह 22 लघु प्रकल्पों में उक्त तिथि तक 28.68 प्रश.जलसंग्रह था. इसमें वर्तमान स्थिति में लघु प्रकल्पों में 40.42 प्रश. जलसंग्रह है.

बड़े प्रकल्पों की स्थिति संतोषजनक
इसी प्रकार बड़े प्रकल्पों का विचार करें तो कटंगी मध्यम प्रकल्प जलाशय में 85.77 प्रश., कलपाथरी जलाशय में 85.22 प्रश.जलसंग्रह है. गत वर्ष इन प्रकल्पों में क्रमश: 11.06 व 9.80 प्रश. पानी था. मोगरा लघु प्रकल्प में वर्तमान में 87.46 व बेवारटोला लघु प्रकल्प में 87.20 प्रश.जलसंग्रह है. जबकि गत वर्ष इन दोनों लघु प्रकल्पों में क्रमश: 56.43 व 30.1 प्रश. जलसंग्रह था.

जलाशयों में पर्याप्त संग्रह
इटियाडोह, सिरपुर, पुजारीटोला, कालीसराड यह प्रमुख जलाशय है. वर्तमान स्थिति में इन जलाशयों में समाधानकारक जलसंग्रह है. इटियाडोह जलाशय 45.83, सिरपुर 48.64, पुजारीटोला 73.86 व कालीसराड में 61.01 प्रश.जलसंग्रह है. उल्लेखनीय है कि इडियाडोह जलाशय से सिंचाई के लिए पानी देना शुरु है. वहीं सिरपुर जलाशय के 3 गेट शुरु है. जिससे उक्त प्रश.में कमी होने की संभावना है.

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