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सिंचाई घोटाला : विदर्भ के 53 प्रकल्प अधूरे

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नागपुर. जिगांव और लोअर पेढ़ी में सिंचाई प्रकल्प का ठेका देने के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप कर बाजोरिया कंस्ट्रक्शन प्रा. लिमिटेड कम्पनी को ठेका आवंटित किए जाने का आरोप लगाते हुए यवतमाल के सामाजिक कार्यकर्ता अतुल जगताप और सिंचाई घोटाले को लेकर जनमंच की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई. याचिका पर सुनवाई के दौरान विदर्भ के 53 सिंचाई प्रकल्प अधूरे होने तथा इसकी वजह से लगभग 10 लाख हेक्टेयर कृषि जमीन सूखी होने के साथ ही 30 लाख किसानों पर संकट की जानकारी उजागर होते ही न्यायाधीश भूषण धर्माधिकारी और न्यायाधीश मुरलीधर गिरटकर ने विदर्भ के सिंचाई प्रकल्पों की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में शपथपत्र देने के आदेश वीआईडीसी को दिए. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. श्रीधर पुरोहित, अधि. फिरदौस मिर्जा ने पैरवी की.

20 मामलों में FIR, 5 में चार्जशीट
गुरुवार को सुनवाई के दौरान एसआईटी एवं भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आर.आर. नागरे की ओर से सिंचाई घोटाले में चल रही जांच को लेकर हलफनामा दायर किया गया, जिसमें बताया गया कि अब तक की गई जांच में 20 मामलों को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है. जबकि 5 मामलों में चार्जशीट भी दायर की गई है. इसके अलावा एसआईटी के अधिकारियों के पास लंबित जांच की भी जानकारी प्रेषित की गई. जिसके अनुसार जिन मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है. उनमें से 1 मामले में कोई तथ्य नहीं पाए जाने पर फाइल बंद कर दी गई. इसके अलावा 7 ऐसे मामले हैं, जिनकी जांच लगभग पूरी हो रही है. शीघ्र ही इसे अंतिम भी किया जाएगा.

12 मामलों की जांच है लंबित
एसआईटी की ओर से दिए गए हलफनामा में बताया गया कि एसआईटी के अधिकारियों के पास 12 मामले जांच के लिए लंबित है. यहां तक कि जिन मामलों में जांच पूरी की गई, उनमें से 8 मामलों में अधिकारियों के खिलाफ दोषारोप पत्र दायर करने के लिए राज्य सरकार के पास मंजूरी के लिए प्रस्ताव लंबित है. गत समय सहसचिव की ओर से दायर किए गए हलफनामा में बताया गया कि जांच के दायरे को देखते हुए तथा मामले में तकनीकी मुद्दे भी शामिल होने के कारण राज्य सरकार ने सार्वजनिक उपक्रम विभाग के सेवानिवृत्त सचिव एस.बी. तामसकर की जांच के लिए 20 नवंबर 2017 को नियुक्ति की है. प्राथमिक स्तर पर 4 माह में जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन जांच का दायरा देखते हुए राज्य सरकार ने 30 सितंबर 2018 तक का समय बढ़ाकर दिया है. हलफनामा में बताया गया कि महाराष्ट्र सिविल सर्विसेस रूल्स के अंतर्गत राज्य सरकार जांच को पूरी करने के प्रति सजग है. राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद जायसवाल का मानना था कि एसआईटी की ओर से 42 प्रोजेक्ट को लेकर जारी 94 टेंडर को लेकर जांच की जा रही है.

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