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29 हजार दिव्यांग उच्च शिक्षा से वंचित

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नागपुर. दिव्यागों की उच्च शिक्षा के लिए आरक्षण का कानून होते हुए भी राज्य सरकार की उदासीनता से राज्य भर में लगभग 29,000 दिव्यांग विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित हैं. दिव्यांगों को भी समाज की मुख्यधारा में लाकर उन्हें सक्षम बनाने व सम्मान की जिंदगी जीने के लिए न्याय देने हेतु आरक्षण का प्रावधान किया गया, लेकिन राज्य सरकार द्वारा इस पर अमल नहीं किया जा रहा है. सभी सरकारी व अनुदानित शिक्षा संस्थाओं में उच्च शिक्षा के लिए दिव्यांग विद्यार्थियों हेतु 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखना बंधनकारक किया गया है, लेकिन इस ओर से पूरी तरह से दुर्लक्ष्य किया जा रहा है.

केवल इंजीनियरिंग में ही लागू
राज्य में केवल तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस वर्ष इंजीनियरिंग के लिए ही उक्त आरक्षण लागू किया गया है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार महाराष्ट्र में दिव्यांगों की संख्या 29.63 लाख है, जिनमें अगर 1 फीसदी विद्यार्थी भी उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हों तो संख्या 29,000 होती है. लेकिन बीते 2 वर्ष से उन्हें उनके हक से वंचित रखा जा रहा है. एक ओर सरकार सभी वर्ग के युवाओं को उच्च शिक्षा के साथ ही स्कील डेवलपमेंट की बात करती है और दूसरी ओर दिव्यांगों के लिए आरक्षित नियमों को भी अमल में नहीं लाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है.

ऐसे विद्यार्थी कहां जाएं
हर दिव्यांग केवल इंजीनियरिंग नहीं करना चाहता. राज्य में कला, वाणिज्य, विज्ञान, बी.एड, डी.एड, एल,एल.बी, एल.एल.एम., विधि, पत्रकारिता, एमबीबीएस, आयुर्वेदिक, फीजियोथेरेपी, बी.एस.डब्ल्यू, एम.एस.डब्ल्यू. ऐसे अनेक कोर्सेस हैं जिनमें बीते 2 वर्ष से दिव्यांगों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा है. सवाल यह है कि ऐसे विद्यार्थी आखिर जाएं कहां? इन्हें तो उच्च शिक्षा से वंचित ही रखा जा रहा है. दिव्यांगों द्वारा मांग की गई है कि इसी वर्ष 2019 से राज्य सरकार सभी क्षेत्रों में 5 फीसदी आरक्षण का कानून लागू कर हो रहे अन्याय पर रोक लगाए.

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