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अंबुजा प्रकल्पग्रस्तों ने दिया धरना

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चंद्रपुर. उपरवाही में अंबुजा सीमेंट कम्पनी के कारण 12 ग्रामों के आदिवासी किसान एवं ठेकेदारी मजदूर के रूप में काम करनेवाले प्रकल्पग्रस्तों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना आंदोलन किया. इस दौरान प्रशासन, सरकार और कम्पनी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. जिलाधिकारी ने इससे पूर्व 45 दिनों में अंबुजा कम्पनी की जांच कर न्याय देने के लिखित आश्वासन प्रकल्पग्रस्त आदिवासियों को दिया था. किंतु 100 दिन बीत जाने के बाद भी जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश नहीं की है.

जांच जल्द खत्म करने की मांग
अंबुजा सीमेंट कम्पनी को आवश्यकता से अधिक समय दिए जाने के चलते जांच समाप्त कर न्याय देने की मांग को लेकर प्रहार के जिला प्रमुख मनपा पार्षद पप्पू देशमुख के नेतृत्व में प्रकल्पग्रस्त आदिवासियों ने धरना आंदोलन किया. आंदोलनकारियों ने कहा कि अंबुजा सीमेंट कंपनी ने 12 गांवों के आदिवासियों की भूमि अधिग्रहण करते हुए पेसा कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किया. पेसा कानून के अनुसार आदिवासी गांव की भूमि का अधिग्रहण करते हुए ग्रामसभा की मंजूरी लेना आवश्यक है. इसी प्रकार प्रकल्पग्रस्तों के पुनर्वास के बारे में ग्रामसभा का अभिप्राय लेना भी आवश्यक है. अंबुजा ने अधिग्रहित की भूमि के मालिकों को नौकरी का लालच दिया, परंतु 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिली है. अंबुजा प्रबंधन आदिवासियों के साथ समझौता कर नौकरी से उन्हें वंचित रखने का षड्यंत्र रच रहा है. कंपनी के मालिक और प्रबंधन के खिलाफ एट्रासिटी अंतर्गत कार्रवाई करने की मांग उन्होंने की.

इन मांगों का समावेश
पेसा कानून का उल्लंघन करने से अधिग्रहण रद्द कर आदिवासियों को उनकी जमीन वापस करने, अदिवासियों का 20 वर्ष का भूमि का किराया देने, कम्पनी प्रबंधन प एट्रासिटी एक्ट के तहत मामले दर्ज करने, प्रकल्पग्रस्तों को स्थायी नौकरी देने आदि मांगें की गईं. धरना आंदोलन की दखल नहीं ली गई, तो अंबुजा का डिस्पैच रोकने, अंबुजा के सामने मालगाड़ी रोकने, जमीन पर कब्जा जमाने की चेतावनी पप्पू देशमुख ने दी है. प्रश्चात मांगों का ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा गया. आंदोलन में सोलापुर, पिंपलगांव, कारवाई, लखनपुर, गड़चांदूर, हीरापुर, विसापुर, छोटा हरदोना, पालीगुडा, सालेगुडा, गोपालपुर आदि गांवों के प्रकल्पग्रस्त, रिंकू पाटिल, ठोंबरे पाटिल किल्लाके, शंकर पाटिल नेणारे, आकाश लोंढे, प्रवीण मटाले, सचिन पिंपलशेंडे, संदीप परकर, संगठन के फिरोज खान पठान, किशोर महाजन, धर्मेंद्र शेंडे, अनिल कोयचाले, लक्ष्यपति येलेवार, सतीश खोब्रागड़े, घनश्याम येरगुड़े, नीलेश पाझारे आदि शामिल हुए.

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